शहर को साफ सुथरा रखने के उद्देश्य से लागू की गई कचरा लिफ्टिंग प्रणाली में पौने 28 लाख रुपये के घोटाला की जांच अधर में अटकी हुई है। ठेकेदार ने अब नगरपालिका को 2 महीनों का 13 लाख 43 हजार रुपये का बिल और थमा दिया है। नगर पालिका अधिकारी इन बिलों को मंजूर नहीं कर रहे हैं। नपा का कहना है कि ठेकेदार ने किसी प्रकार का कोई टेंडर नहीं लिया था।
अब ठेकेदार हाई कोर्ट की आड़ में फर्जी बिलों के सहारे 13 लाख की राशि लेने के प्रयास में है। बता दें कि पूर्व डीसी धीरेंद्र खडगटा ने कूड़ा उठाने के टेंडर का मामला उठने पर इसकी जांच अगस्त 2019 में एडीसी को दी थी। एडीसी की जांच में 28 लाख का घोटाला सीधे टेंडर की निर्धारित राशि से अधिक देना पाया गया था। एडीसी ने कार्रवाई के लिए डीसी को पूरी रिपोर्ट दी थी। लेकिन एक साल बीत जाने के बावजूद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
पौने 15 लाख की जगह बांट दिए साढ़े 42 लाख
नगर पालिका के वाइस चेयरमैन अनिल नड्डा, पार्षद नरेंद्र बागड़ी, सुदेश ग्रोवर, सुदेश दहिया, नीलम गर्ग, रिंपी सोनी, कश्मीरी लाल कंबोज, ओम प्रकाश कंबोज आदि ने 25 जून 2019 शिकायत में आरोप लगाया था कि नगर पालिका के अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार को लाखों रुपये का फायदा पहुंचकर सार्वजनिक संपत्ति हो नुकसान पहुंचाया है। उन्होंनें बताया कि सफाई कूड़ा उठाने के बारे में एक टेंंडर 31 मार्च 2019 तक ट्रायल के आधार पर लगाया गया था। टेंडर में ठेकेदार को 15 फीसदी अतिरिक्त चार्ज को मिलाकर 4 लाख 91 हजार 625 रुपये प्रति महीना दिया जाना था। लेकिन जनवरी 2019 माह से एक प्राइवेट कंपनी के ठेकेदार को 4 लाख 91 हजार 625 रुपये देने की जगह 8 मार्च 2019 को 19 लाख 71 हजार 358 रुपये सौंप दिये। अधिकारियों ने फर्जी बिलों के सहारे 42 लाख 53 हजार 413 रुपये के चेक कचरा लिफ्टिंग के नाम पर ठेकेदार को दे दिए थे।
13 लाख 43 हजार की वसूली का प्रयास
ठेकेदार ने तीन महीनों के ट्रायल टेंडर को पुनः प्राप्त करने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करके सटे ले लिया था। अधिकारिक रूप से टेंडर से संबंधित कोई भी लिखित आदेश नहीं हुए थे और ना ही कोर्ट ने भविष्य में कचरा लिफ्टिंग को लेकर प्रशासन को कोई गाइडलाइन जारी की थी। लेकिन ठेकेदार ने अब दो महीनों का लाखों रुपये का बिल नगरपालिका को दिया है। अप्रैल महीने का 6 लाख 52 हजार व मई 2019 का 6 लाख 91 हजार का कचरा लिफ्टिंग के नाम के फर्जी बिल पास करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
नियम के अनुसार करेंगे भुगतान
नगर पालिका के कार्यवाहक सचिव राजेंद्र सोनी ने बताया कि कचरा लिफ्टिंग के विवादित बिल को लेकर अगर ठेकेदार को टेंडर या सरकार से मंजूरी मिली है तो बिल का भुगतान करेंगे। वरना गलत रूप से किसी को भी किसी प्रकार का भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि काम नगर पालिका के नियमों के अनुसार किया है तो दबाव देने की जरूरत नहीं है।
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